Tuesday, April 4, 2023

खुदा जुदा हो गया.!

जिसे मैंने माना खुदा 
उसी से मेरा दिल दुखा 
हर कोई महादेव नहीं होता है न
जो असुरों को भी वरदान दे 
लेकिन यार मुझे तो ईश्वर शब्द से ही नफरत था 
मैं तो एक घनघोर नास्तिक था...
जिंदगी से हारा 
झूठी उम्मीदों का लिया सहारा
उसने भी कर लिया किनारा
उसका आगमन 
मेरा दमन 
करने आया था..
जीने की वजह बनकर 
मुझे बीच अंधेरे में 
चला गया अकेला छोड़कर 
हा, वही कमबख्त है जिसे 
मैंने अपना खुदा माना था....!


Friday, February 24, 2023

मेरी दुनिया हो तुम

लिखकर कविताएं मैंने
 तुम्हारी यादों को संजोया है
क्या फर्क पड़ता है
दुनिया कुछ भी सोचे
मैने क्या खोया क्या पाया है..!
बनने दो तमाशा मेरा 
दुनिया के सामने
मैने जब भी आंखे खोली
सिर्फ तुमको पाया है 
ओह! मेरी दुनिया तो तुम हो..!
साहित्य की काल्पनिक 
दुनिया बन चुकी हो,
भले सौ कोस दूर जा चुकीं हो..!!

©शिवम

Saturday, February 4, 2023

योद्धा का युद्ध

योद्धा युद्ध लड़ता रहता है 
चाहे रणभूमि में हो या 
मन के भीतर
हथियारों का युद्ध हो या
विचारों का युद्ध..
ईश्वर ने लिया अवतार
वक्त के हिसाब से
कभी कृष्ण तो कभी बुद्ध...
आवश्यकता हुई तो
 सुदर्शन चक्र चला
असुरों का संहार किया...
जब देखा मनुष्य विचलित हो रहे है
तब धर्म चक्र चला 
संसार का उपकार किया..
एक दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है
तो दूसरा प्रगति और जीवन का प्रतीक है...!!

©शिवम

Monday, January 23, 2023

कुछ बड़ा करना है मुझे

कुछ नही आता मुझे
जीवन में कुछ करना भी नही हैं
बस मुस्कुराता रहता हु 
चाहें परिस्थिति कुछ भी क्यों ना हो..
उम्मीदों का झूठा पुलिंदा बांधकर चलना नही मुझे
जो वास्तविकता है, शाश्वत सत्य है वही पसंद है मुझे....
जहा मन नही लगता वहा एक पल नही रुकता 
भले ही क्यों ना हो स्वर्ग से सुंदर वाटिका..
मेरा जो लक्ष्य है उसको हासिल करूंगा
चाहे जिस हद तक गुजरना पड़े
मृत्यु के देवता से उलझना पड़े 
मैं खुद से किया वादा जरूर पूरा करूंगा...
बाकी कुछ नही करना जीवन में मुझे..!!

©शिवम

Monday, July 25, 2022

भीग जाने दो खुद को



भीग जाने दो खुद को
 भीगने का अलग ही मजा है 
ना भीगे जीवन में तो
 ये जीवन नही एक सजा है 
देखो मानता हु
 दुख दर्द संताप पीड़ा से भरे हुए हो 
खुद की नजरों में गिरे हुए हों
 इसीलिए भीग जाओ बरसात में
 रोकर आसूओ को बह जाने दो
मन को हल्का हो जाने दो 
और गुप्त रह जायेगा रोना भी 
बरसात में सब धूल जाएगा
 क्षण भर में सब बह जाएगा 
बरसात की आड़ लेकर खुलकर रोलो 
भीतर जो कुछ इस बरसात में धोलो...

©शिवम

Wednesday, July 6, 2022

जीवन के सफर में

जीवन के सफर में बहुत कुछ
 न चाहते हुए भी त्यागना पड़ता है, 
मन को मारकर थीर करना पड़ता है...।
असंभव कुछ भी नही है दुनिया में 
पर प्रकृति के कुछ नियम है 
इसमें बंध कर चलना पड़ता है.....।
 होगा पुनर्जन्म मानता हु
 पर इस जन्म तमाम झंझावतों से 
होकर गुजरना पड़ता है......!
ये "पर" पर कुतर देता है उड़ती हुई चिड़िया का 
पर अंधेरों में कौन उड़ान भरता है..!

©शिवम 

Saturday, May 21, 2022

उजालों की तरफ

रुक सा गया
थम सा गया संसार
चले जाने वालो की 
यादों ने घेरा बार बार।

ये उन्मादीत मन
अल्हड़ सा जीवन
ना आज की फिक्र
ना का कल का जिक्र
निरंतर खोया रहता है
पुराने ख्यालों में
प्रयास करता रहता है
अंधेरो के आवरणों से
निकल कर आए उजालो में।

©शिवम