Wednesday, April 1, 2026

अनकहे किस्से



मौत के मुहाने पर खड़े होकर 
वो कहते हैं हमसे मिलेंगे 
हम कम्बख़त आखिरी बार भी मिल न पाए
कैसे हैं आप ये हाल चाल भी न ले पाए
तड़पकर रह जाता है मन
मिल न पाए उनके करीब होकर...
हमारे सामने चिता पर जलता रहा उनका तन 
आत्मा अमर है,क्या अगले जन्म होगा पुनः मिलन? 
विस्मृत विस्तृत कोरे कागजों पर लिख दिया 
क्या फर्क पड़ता है हमने अपने जीवन में क्या किया
लोग जान जाए मेरे अनकहे किस्से 
मरने के बाद अब गिला शिकवा किससे 
मालूम होनी चाहिए मेरी हकीक़त 
ईमानदारी और सत्य है मेरी वसीयत।।

Thursday, February 26, 2026

जितना गिरोगे उतना ही कटोगे

लोकतंत्र की आवाज को देखो बोलता है जोर से "आवाज दो हम एक हैं"... अनेकता में एकता तो भी सामाजिक समरसता की भावना उड़ेलते हुए
विचारधारा से समझौता कर फिर कहते हैं कुछ लोग की हम अपनी बातों पर अटल हैं..
खोखली पीलपीली लिजलिजाती हुई राजनीति कहा लेकर जाएगी... भविष्य अंधकारमय है वर्तमान में सब अंधे हैं अंधों को क्या फर्क पड़ता है अंधेरा है या रोशनी! 
युवा वर्ग की विवेचना साड़ी साया ब्लाउज स्कर्ट आदि तमाम तरह के वस्त्रों से ऊपर उठ ही नहीं सका है.. इसी को कहते हैं कि ये "नारीवादी" विचारधारा है। विचारधारा में "धारा" कही और ही बहती है... बेजान पड़ जाती है तो संविधान बचाने निकलती है। तख्ती पर लिखा जाता है "ब्राह्मणवाद से आजादी" दिल्ली में विस्फोट करते मौलाना जिहादी। कमीनापन और कठमुल्लापन में ज्यादा अंतर नहीं बस एक का रंग लाल और एक का रंग हरा है।
समाजवाद की पराकाष्ठा देखो "रोटी बेटी" संबंधों पर आ पड़ी है वो कहते हैं एकता और समता के लिए चुप रहो अखंडता की बात करो... वाह मां बहनों की इज्जत से इनकी राजनीति बड़ी है। मोपला से लेकर अबतक कितना गिरोगे? जितना गिरोगे उतना ही कटोगे... दबाए कुचले जाओगे। वोट के लिए क्या अपनी मां को भरे बाजार में बिकवाओगे? अस्तित्व की बात जब आती है तो अच्छी-अच्छी सत्ताएं उखड़ जाती है। "ये देश युद्ध का नहीं बुद्ध का है" बोलने से नहीं हो जाता है...यहां वीरता धैर्यता सुदर्शन चक्र से मापा जाता है।
अकर्मण्य और रीढ़हीन लोग किसी के काम के नहीं होते हैं। किसी ने कहा है "वीर भोग्य वसुंधरा" तो सत्य ही कहा है। कायरों के लिए विश्व में कोई स्थान नहीं है।

पशु चिकित्सक डीएनए एक्सपर्ट का क्या ही कहना। ये और इनका संगठन आजकल कुछ भी करते हैं वो आम लोगों के समझ से बाहर ही रहता हैं। इनके लिए सबका डीएनए एक है सबकी रगो में एक ही खून दौड़ रहा है।चलो माना कि "जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुककर उठाना होगा" पर इतना भी क्या झुकना  की कोई मारने लग जाए पीछे से। किसी भी कानून में मास्टरस्ट्रोक खोजने वाले को ये पता होना चाहिए "ठंडी चाय" के लिए चायवाला गाली ही सुनेगा। लोग कीमत चुकाते हैं एक अच्छी चाय के लिए इसपर भी कोई बांसी ठंडी चाय का समर्थन करे कि स्वास्थ्य के लिए बढ़िया होता है तो वो भी गरियाए जाने का उतना ही पात्र होगा जितना कि वो चाय वाला।