वो कहते हैं हमसे मिलेंगे
हम कम्बख़त आखिरी बार भी मिल न पाए
कैसे हैं आप ये हाल चाल भी न ले पाए
तड़पकर रह जाता है मन
मिल न पाए उनके करीब होकर...
हमारे सामने चिता पर जलता रहा उनका तन
आत्मा अमर है,क्या अगले जन्म होगा पुनः मिलन?
विस्मृत विस्तृत कोरे कागजों पर लिख दिया
क्या फर्क पड़ता है हमने अपने जीवन में क्या किया
लोग जान जाए मेरे अनकहे किस्से
मरने के बाद अब गिला शिकवा किससे
मालूम होनी चाहिए मेरी हकीक़त
ईमानदारी और सत्य है मेरी वसीयत।।